क्या अंतरराष्ट्रीय न्यायालय दिला पाएगा पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव को न्याय?
पिछले 3 वर्षों से पाकिस्तान की जेल में बंद और फांसी की सजा पा चुके भारतीय पूर्व नौसेना अधिकारी की किस्मत का फैसला 17 जुलाई को अंतरराष्ट्रीय न्यायालय द्वारा दिया जाएगा। कुलभूषण जाधव को लेकर अंतरराष्ट्रीय कोर्ट में भारतीय और पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय वकील एक-दूसरे के आमने-सामने थे। भारत ने कुलभूषण जाधव को जासूस ना होने के बात पर कई सबूत पेश किए। वहीं पाकिस्तान हर मौके पर कुलभूषण जाधव को भारत का जासूस साबित करने का प्रयास करता रहा। हालांकि अभी तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई बहस से यह पता चला है कि पाकिस्तान ने जबरदस्ती कुलभूषण जाधव को फांसी की सजा सुनाई है। मगर क्या अंतरराष्ट्रीय न्यायालय पूर्व भारतीय नौसेना अधिकारी कुलभूषण जाधव और उनके परिवार को न्याय दिला पाएगा?
क्या मिल पाएगा कुलभूषण जाधव और उनके परिवार को न्याय?
दरअसल भारतीय पूर्व नौसैनिक अधिकारी कुलभूषण जाधव मार्च 2016 में ईरान में व्यापार करने गए हुए थे। वहां से उनका अपहरण कर पाकिस्तान ले आया गया। जहां पर पाकिस्तान की सैन्य अदालत ने उन्हें भारतीय खुफिया एजेंसी रॉ का सदस्य बताते हुए तुरंत मौत की सजा सुना दी थी। जबकि कुछ अंतरराष्ट्रीय पत्रकारों और एजेंसी उन्हें यह खुलासा किया था कि कुलभूषण जाधव को अगवा किया गया था। पाकिस्तान ने दावा किया था कि पाकिस्तानी सेना ने कुलभूषण जाधव को पाकिस्तानी बॉर्डर के पास गिरफ्तार किया था। अब 17 जुलाई को इस मामले पर अंतरराष्ट्रीय कोर्ट का फैसला आ रहा है। सबकी निगाहें 17 जुलाई को हेग के समयानुसार 3:00 बजे और भारतीय समय अनुसार 6:30 बजे पर टिकी हुई होंगी।
पाकिस्तान की नियत में खोट
दरअसल कुलभूषण जाधव को लेकर पाकिस्तान की नियत में पहले से ही खोट रहा है। वह कुलभूषण जाधव को लेकर तरह तरह की कहानियां गढ़ता आ रहा है। गिरफ्तार करने के 1 महीने बाद उनके खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। 3 मार्च 2016 को कुलभूषण जाधव को गिरफ्तार किया गया था। वहीं अप्रैल 2016 में उनके खिलाफ एफ आई आर दर्ज की गई। भारत में संपर्क के लिए अब तक पाकिस्तान को 13 बार रिमाइंडर भेजें बार-बार इसे नामंजूर करता रहा। अप्रैल 2017 में जल्दी बाजी में पाकिस्तान की अदालत ने जाधव को फांसी की सजा सुना दी थी। जिसके खिलाफ भारत अंतरराष्ट्रीय न्यायालय में अपील की थी।

मेरे लिखने का सभी के लिए भले कोई अर्थ नहीं होता..
मगर मेरा लिखना हर किसी के लिए व्यर्थ नहीं होता।



